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Poems

Do you like to read long poems? So don’t go anywhere we have a large number of poems in Hindi.

हम हर उस इंसान से नफ़रत करते है….

हम हर उस इंसान से नफ़रत करते है,
जिससे वो मोहब्बत करते है,

वो हमारी नज़रों में हर वक्त चुभता है,
जो उनके दिल में बसता है,

हम उस है इंसान को दुश्मन समझते है,
जो उनके हमसे बेहतर दोस्त बनते है,

हमे वो हर साथ नागवारा है,
जिसने उनका हाथ थाम चलना चाहा है,

हमे वो नज़रे रास नहीं आती है,
जो उन्हे हमसे ज्यादा निहारती है,

माना कि उनपर हमारा कोई हक,

बेशक नहीं….

लेकिन वो हमारे कभी नहीं हो सकते,
ये जानकर हम उन्हे चाहना छोड़ दे,

बेशक नहीं

वो उस इंसान के साथ खुश है,
जिसे हम पसंद नहीं करते,
तो उनकी खुशी देखकर हम जले

बेशक नहीं….

लेकिन क्या उन्हे किसी ओर के साथ देख कर बी हम खुश रह सकते है,

शायद नहीं….

Sad Shayari In Hindi

जब पहली दफ़ा तुम्हें देखा था मेने,
लगा ना जाने क्यों लोग दुनिया में गुम हो जाते है,
जबकि मैं तो बस तुम्हारी आँखों में ही गुम हो गया।
जैसे इस चेहरे को मुस्कान का सहारा
मिला हो और दिल को नयी बैचैनी।
सोचता हु की सारी उमर तेरी उन नजरों को ही ताकता रहू
बस तिलगी में आकर थाम लेना तू ये दामन मेरा,
आखिर कब तलक तेरी नज़रों से यु भागता रहू।।

Jab pehlu dafa tumhe
dekha tha mene,
laga na jane kyu log duniya
me gum ho jate h,
jabki me to bas tumhari aakho
me hi gum ho gya hu,
jaise is chehre ko muskan ka sahara
mila ho or dil ko nayi bechaini.
sochta hu ki saari umar teri
un nazro ko hi taakta rahu,
bas tilgi me aakar thaam le
tu ye daaman mera,
aakhir kab talak teri
nazro se yu bhagta rahu.

लगता है ख़ामोशी मज़बूरी है मेरी
पर तेरा हर सवाल अच्छा लगता है,
यूँ तो ऐसा कभी कोई दिन ना बिता
जिस दिन तेरा ख्याल ना आया हो,
अधिकतर रातों को सपनो में तेरा
कोई पैगाम ना आया हो,
सोचा था की तेरे बिन मेरा कोई वजूद नहीं है जैसे
और खो गया था तुझमे खो के खुद को ऐसे,
पर अब जब जा चुके हो तुम
जो मुझसे यूँ दूर…..
तब जाके जाना की आदत नहीं थी तेरी
सिर्फ तेरा साथ अच्छा लगता है।

Hindi Poem on Garibi

कितनी बेदर्द है गरीबी..
पैरो में छाले है
फिर भी पैदल चलती है गरीबी,
भूख से पेट बिलख रहा
फिर भी भूखा सुलाती है गरीबी,
हाथों में तकलीफ है
फिर भी बोझ उठवाती है गरीबी,
मन में पड़ने की आस है
फिर भी हाथो से कलम छिन लेती है गरीबी,
बचपन में खुली बाहे है
फिर भी जिम्मेदारी के बोझ तले दबाती है गरीबी।
कितनी बेदर्द है गरीबी…

Kitni bedard hai garibi..
pairo me chaale hai
fir bhi paidal chalti hai garibi,
bhukh se pet bilakh raha
fir bhi bhukha sulati hai garibi,
hathon me taklif hai
fir bhi bojh uthwati hai garibi,
man me padne ki aas hai
fir bhi hathon se kalam chin leti hai garibi,
bachpan me khuli baahe hai
fir bhi jimmedari ke bojh tale dabati hai garibi…
kitni bedard hai garibi…

Sad poem in hindi

अपने आंसुओं को इस दिल के समंदर
की लहरों से आजमाया ना कर,
तू आग का एक दरिया भी है,
यूं चंद आंसुओं के लिए इसे ज़ाया ना कर।।
के कुछ के चले जाने से तू कभी गमगीन ना होना,
थक के कुछ देर बैठ जा,
मगर इस दिल को कभी हराया ना कर।।।।
तू खुद को कभी आजमाया ना कर,अपने दिल को यूं रुलाया ना कर।।

Apne aasuo ko iss dil ke samandar
ki lehro se aajmaya naa kar,
tu aag ka ek dariya dariya bhi hai,
yu chand aasuo ke liye ise jaaya naa kar..
ke kuch ke chale jaane se tu kabhi gamgin naa hona,
thak ke kuch der beth jaa,
magar iss dil ko kbhi haraya naa kar….
tuu khud ko aajmaya naa kar, apne dil ko yu rulaya naa kar.

Hindi poem

जाता हूँ कही भी
पर घर जैसी हसीन रात नहीं होती,
सोचा था मिल बैठेंगे सभी यार
पर क्या करे मुलाक़ात नहीं होती,
निकलते थे घर से सपने पुरे करने
पर किसे बताये माँ से मिले बगैर
दिन की शुरुआत नहीं होती,
किसी अजनबी ने सही कहा था,
शहरों में शाम नहीं होती।

Jaata hu kahi bhi
par ghar jaisi haseen raat nhi hoti,
socha tha mil bethenge sabhi yaar
par kya kare mulaqat nhi hoti,
nikalte the ghar se sapne pure karne
par kise bataye maa se mile bagair
din ki shuruaat nahi hoti,
kisi ajnabee ne sahi kaha tha,
shehro me sham nahi hoti.