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Latest Hindi Shayari 2021

यहीं तक रह जाने दो इसे
सही सलामत किनारे तक पहुचायेगी,
कागज़ की कश्तियां है दोस्त
ख्वाबों का बोझ ये नहीं उठा पायेगी।

Yahi tak reh jane do ise
sahi salamat kinaare tak pahuchayehi,
Kaagaz ki kashtiya hai dost
khwabo ka bojh ye nahi utha payegi.

बहुत करीब आ गयी थी वो मेरे,
मुझे लगा जैसे मेरी ही हो।

Bahut karib aa gayi thi wo mere,
Mujhe laga jaise meri hi ho.

करी थी मेने जिससे मोहब्बत,
अब वो बेकार हो गयी
मैं जिसे अपना समझता था…
अब वो किसी और की हो गयी।

Kari thi mene jisse mohabbat,
Ab wo bekar ho gayi,
Me jise apna samjhta tha…
Ab wo kisi or ki ho gayi.

मत बोला कर ऐसे कड़वे बोल
इनका रस मै पी ना सकूँगा,
अरे मै तो दीवाना हूँ तेरी उन हसीन बातो का
जिनका ज़िक्र मै कभी कर ना सकूँगा,
तूने जगह ही ऐसी बनाई है वहा
जहा से अब तुझे बहार मै कर ना सकूँगा।

Mat bola kar ese kadwe bol
Inka ras me pii na sakunga,
Are me to deewana hu teri un haseen bato ka
Jinka jikra me kabhi kar na sakunga,
Tune jagah hi esi banayi hai waha
Jaha se ab tujhe bahar me kar na sakunga.

यूँ तो होंगे कई बादल इस शहर में
मगर उन आँखों के अलावा मेने किसी
और को बरसते नहीं देखा।

Yun to honge kai baadal is seher me,
Magar unn aankhon ke alawa mene kisi
aur ko baraste nahi dekha.

सुई की फितरत सिर्फ चुभने की थी साहब
मिला साथ धागे का.. फितरत ही बदल गयी।

Sui ki fitrat sirf chubhne ki thi sahab
Mila sath dhaage ka.. fitrat hi badal gyi.

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