New Two Line Shayari

कोई बड़े सपने नहीं है आसमा भी किसे चाहिए,
छोटी छोटी खुशियां और साथ तुम्हारा चाहिए।

हक़ीक़त में ना सही तो ख्वाबो में ही सही,
हर बार इज़हार मुकम्मल तो होता है।

Haqiqat me naa sahi to khwabo me hi sahi,
Har bar ijhaar muqammal to hota hai.

जलाकर अपना कलेजा चाय को बाहों में भरता है,
कुल्हड़ जैसा इश्क़ भला कौन करता है।

Jalakar apna kaleja chai ko baaho me bharta hai,
Kulhad jesa ishq bhala kon karta hai.

वो नासमझी का बचपन ही अच्छा था,
बड़े क्या हुए हर चीज समझ बैठे।

Wo naasamjhi ka bachpan hi achha tha,
Bade kya hue har chij samajh bethe.

अपनी कमियों को छुपाने में इतना मशरूफ हो गए सब,
अपनी कामयाबियों को ऊजागर नहीं कर पा रहे अब।

Apni kamiyon ko chupane me itna mashroof ho gye sab,
Apni kamiyabiyo ko ujagar nahi kar paa rahe ab.

कुदरत का मिजाज ही कुछ ऐसा है,
खुद को मिटा देना होता है फिर से खुद को बनाने के लिए।

Kudrat ka mijaj hi kuch esa hai,
Khud ko mita dena hota hai fir se
khud ko banane ke liye.

तू किसी coding की तरह उलझी सी,
मैं किसी coder की तरह सुलझा सा।

Tu kisi coding ki tarah uljhi si,
Me kisi coder ki suljha sa.