चाँद शायरी

इस चांद की रोशनी में मैं ठेहरा रहा,
भटकता रहा वहा,जहा तेरा बसेरा रहा।।
खोकर भी पाया है,जैसे जहान से आसमा,
तेरी हंसी से जब भी मेरा सवेरा हुआ।।।।

Iss chand ki roshni me main thehre raha,
bhatakta raha waha, jaha tera basera raha..
khokar bhi paya hai, jaise jahan se aasma,
teri hasi se jab bhi mera sawera hua…..

नमूदार हुआ है चांद आज फलक पर,
बस तूने अपने वादे पर ऐतबार ना किया।।
ग़ज़ब किया – मेरी ज़िन्दगी से रुखसत होकर,
के तूने भी कयामत का इंतज़ार ना किया।।।।

Namudar hua hai chand aaj falak pr,
bs tune apne waade pr aitbaar na kiya..
gajab kiya meri zindagi se rukhsat hokar,
ke tune bhi qayamat ka intezar na kiya…

उसके चेहरे की चमक के सामने सादा लगा,
यूँ तो आसमां में चाँद पूरा था
लेकिन फिर भी आज आधा लगा।।