Broken heart shayari

केहती रही वो मुझे कि – हम इश्क़ को बेवजह बदनाम किए बैठे हैं,
क्योंकि उसे हम कुछ मुनाफिकों के नाम जो किए बैठे है।।
भूल रहा था मैं कि – इश्क़ का मर्ज तो…सिर्फ हम लगाए बैठे हैं,
और वो जनाब तो मरघट को भी विरां बनाएं बैठे हैं।।।।

Kehti rahi wo muje kii – hum ishq ko bewajah
badnaam kiye bethe hai,
kyuki use hum kuch munafiko ke naam
jo kiye bethe hai..
bhul raha tha main kii – ishq ka marz to… sirf hum lagaye bethe hai,
orr wo janab toh marghat ko bhi
veeran banaye bethe hai….

अपने अतीत से भी उसे निकाल सकू,
इतना भी इस दिल के बस में नहीं।।
मुसलसल उसकी गैरमौजदगी हर रोज़,
इस जबीन पे शिकन ले आती है ।।।।