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Yaad Shayari in Hindi

खो गया हू हँसी के उस लिबास में,
चोट खायी खुद ने पर हँसा उसकी याद में..
कुर्बत भी थी तुम्हारी कब्र की तरह,
तुम सामने तो थे..
ना जाने क्यों मर गए हमारी याद में!!!!

Kho gaya hu hasi ke us libaad me,
chot khayi khud ne pr hasa uski yaad me,
kurbat bhi thi tumhari kabr ki tarah,
tum samne to the..
naa jaane kyu mar gaye hamari yaad me..

ये करवटी सी रातें
और वो बिखरी सी बातें,
वो सिरहाने का साथ
अब दिलाता है तुम्हारी याद,
पहले गुज़रती थी चैन से वो रातें,
घंटों बैठकर करते थे सारी बातें,
पता नहीं अब कैसे देखु ये ख्वाब..
अब वो जज़्बात बस रेह गए फ़रियाद..
कहाँ गयी वो पिछली मुलाकाते????
जहाँ अब कभी हम मिल भी ना पाते,
कैसे दिलाऊ तुम्हें अब याद..
अब तो दो मेरे आँसुओ का हिसाब!!

Ye karvati si raatein
or wo bikhrii si baatein,
wo sirhane ka saath
ab dilata hai tumhari yaad,
pehle guzarti thi chain se wo raatein,
ghanto bethkar krte the saari baatein,
pata nahi ab kese dekhu ye khwaab..
ab wo jazbaat bas reh gaye fariyaad..
kaha gayi wo pichli mulaqaate????
jaha ab kabhi hum mil bhi nahi paate,
kese dilau tumhe ab yaad..
ab to do mere aasuo ka hisaab!!

रोना चाहता हु मगर रोने नहीं देती,
हसना चाहता हु मगर हसने नहीं देती,
भूलना चाहता हु मगर भूलने नहीं देती,
छोड़ना चाहता हु लेकिन साथ छुटने नहीं देती,
ये सबकुछ भूलकर एक नयी ज़िन्दगी बसाना चाहता हु…
मगर ये ऐसा होने नहीं देती…
एक तेरी याद ही तो है.. जो मुझे सोने नहीं देती!!

rona chahta hu magar rone nahi deti
hasna chahta hu magar hasne nahi deti
bhulna chahta hu magar bhulne nahi deti
chodna chahta hu lekin sath chutne nahi deti
ye sab bhulkar ek nayi zindagi basana chahta hu
magar ye esa hone nahi deti
ek teri yaad hi to hai jo mujhe sone nahi deti…

आबरू थी उसकी, मेरी इन नजरो में…
पर वो मग्रुर मुझे गलतफहमियों से बाहर
निकलना सिखाता गया,
बैठा था उसकी सदाकत को ही परछाई मानकर,
इन ख्वाबों में दफ्फतन, वो मेरी ख़त्म हो
रही मयकशी में जाम मिलाता गया,
और मैं अपनी यादों से उसे मिटाता गया,
और अपने आप को ये समझाता गया।।

आबरू – इज्जत।
मग्रुर – घमंडी।
सदाकत – सच्चाई।
दफ्फतं – अचानक।
मयकशी – शराब।

Aabru thi uski, meri inn najro me…
par wo magrur mujhe galatfehmiyon se
bahar nikalna sikhata gaya,
betha tha uski sadakat
ko hi parchayi mankar,
inn khwabo me daffanat,
wo meri khatm ho rahi maykashi
me jaam milata gaya,
aur me apni yaadon se use mitata gaya,
aur apne aap ko ye samjhata gaya.

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